आरएसएस का वामपंथियों से प्रशस्ति प्रमाण पत्र का गोलमाल

आदित्यनाथ

आज Opindia ने PTI के देश विरोधी एजेंडे पर रिपोर्टिंग की है। मैं तो PTI में Press Trust of India को देखकर इसे भारत का आधिकारिक न्यूज पोर्टल समझता था।

जब से भाजपा की सरकार बनी आरएसएस यानी कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने ही लोगों को किनारे करके बामपंथियों में अपनी दृष्टि तलाशने लगा।

आरएसएस को कभी अपने संगठनों और विचारों पर भरोसा ही नहीं हुआ। आरएसएस लेफ्टिस्टों से अपने ज्ञान की वेलिडिटी लेने लगे।

GB पंत सोसल साइंस इंस्टिट्यूट में भगवान श्री राम में जातीय अस्मिता ढूंढने वाले व्यक्ति प्रोफेसर बद्री नारायण पर समय समय पर कृपा बरसाते रहे।

बदले में ये लोग वहाँ के सेमिनार हाल में कार्यक्रम कर करा के खुश होते रहे। जब पंत संस्थान की बात करता हूँ तो भाजपा या आरएसएस के लोग कहते हैं कि उनपर तो दिल्ली के एक बड़े प्रचारक का हाथ है।

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के मेम्बर्स की लिस्ट देख कर आरएसएस और भाजपा के Level of Demorlization का अंदाज़ा हुआ।

वो तो अगर Opindia ने अगर खुलासा नहीं किया होता तो मैं अभी भी इसे भारत का प्रेस ट्रस्ट मानता रहता।

आरएसएस और भाजपा के अनिर्णय की स्थिति का अंदाज़ा लगाइये कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हंगलू की गलतियों को कार्यकर्ताओं ने आंख में उंगली डाल कर दिखाते रह गए लेकिन फिर भी आरएसएस को वो दिखा नहीं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय बर्बाद हो गया।

हिन्दुस्थान न्यूज एजेंसी तो ऐसे ही गद्दारों के खिलाफ लड़ने के लिये स्थापित हुआ था ना ?? सरकार बनने के बाद उसको एक प्राइवेट व्यक्ति को सौपने के बजाय अगर इसक उद्धार करती तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।

आखिर प्रश्न उठता है कि आरएसएस ने इस तरह अपने ही स्वेमसेवकों को हतोत्साहित क्यों करती रहती है ?? तो इसका सबसे गंभीर उत्तर यह है कि आरएसएस बामपंथियों को नाराज नहीं करना चाहती है। आरएसएस को बामपंथियों से ज्ञान की स्वीकृति लेने की आदत ही गयी है।

जिनको देखिए डरा हुआ है। घिन्न आती है। कांग्रेस को देखिए बेबाकी से अपने संस्थानों की स्थापना के लिये कार्य करती है। और आरएसएस बामपंथियों के कार्यालयों पर खड़े होकर अपने कार्यों की संस्तुतियों के लिये इंतज़ार करती रहती है।

PTI के इस कृत्य का संज्ञान लेते हुये, सरकार को इनका सारा ठेका रोकना चाहिए।

PTI के सदस्य

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