हिंदी भाषी क्षेत्रों के शोधार्थी , डॉक्टरेट की उपाधी लेकर भैंस चराएँ माननीय कुलपति महोदय ??

इलाहाबाद विश्वविद्यालय #शिक्षकभर्ती #इनब्रीडिंग

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय, BHU, RU के शिक्षक नियुक्ति में अकादमिक इनब्रीडिंग की बात कही है। इस विषय पर मेरा मानना है कि आखिर AU, BHU, AMU में अगर अकादमिक इनब्रीडिंग नहीं होगा तो यहां के पीएचडी होल्डर कहाँ नियुक्ति पाएंगे।

शिक्षकों की नियुक्ति में वैसे भी क्षेत्रवाद हावी है। गैर हिंदी भाषी अकादमिक या फिर हिंदी भाषी अकादमिक जो विदेश या फिर विदेशी चिंतकों और विदेशी भाषा मे जो शोध करते हैं। वास्तविक में वह अराजक शोध होता है।

इसी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुछ ऐसे हताश शिक्षक नियुक्ति पाए हैं जो कहते हैं कि शिवलिंग पर पेशाब करो। विषय ऐसे शिक्षकों की मानसिकता का है, वह आलोचना का स्तर इतना गिरा देते हैं कि उसके बाद अराजकता और इस तरह के मानसिकता से घृणा होने लगती है।

रही बात वामपंथियों की तो आज के वामपंथी हरम की वकालत तो करते हैं लेकिन उनमें नैतिकता का थोड़ा बहुत भाव होता है। आज के वामपंथी गैर बराबरी और सामाजिक न्याय की बात करते-करते लोकसंस्कृति विरोधी हो गए हैं ,फिर भी अभी इन विश्वविद्यालय के वामपंथी लोकसंस्कृति की आलोचना, तर्कहीन होकर करने से डरते हैं। उन्हें लगता है कि कहीं मुझे कोई आम आदमी बीच सड़क पर नंगा ना कर दे। इसलिये इन विश्वविद्यालयों के माहौल में पैदा हुये मोडरेट वामपंथी घृणा बाहर तो परोसते हैं लेकिन ऐसे कार्य यहां कोई खुल कर नहीं करता है।

इन विश्वविद्यालयों में बाहर से ट्रेंड कोई भी शिक्षक आवारा की तरह बर्ताव करते हैं और विश्वविद्यालयों को भीषण क्षेत्रीय और वैचारिक गुटबाजी का अड्डा बना देते हैं। AU, BHU, AMU में बाहर से शिक्षा पाए शिक्षक ही विश्वविद्यालय को तबाह करते हैं । और यही आरोप कुलपतियों पर भी लागू होता है।

मेरा मानना है कि आगे आने वाले समय मे यह इनब्रीडिंग और बढ़ेगा। क्योंकि अब नॉलेज का प्रोडक्शन बहुत तेज गति से हो रहा है। गली-गली में पीएचडी की डिग्री छप रही है।

इनब्रीडिंग को रोकने के लिये पीएचडी एनरोलमेंट में कमी लानी होगी। उसमे यह ध्यान रखना होगा कि पीएचडी स्कॉलर JRF के पैसे से जमीन ना खरीद रहा हो । इसलिये इतने हाड़तोड़ माहौल में इनब्रीडिंग स्वाभाविक और तर्कशील प्रोसेस है।

अब वो दौर नहीं रहा कि UP, बिहार का व्यक्ति बंगाल या तमिलनाडु में नियुक्त हो जाये। दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति में सामाजिक दूरदर्शिता का घोर अभाव है। उन्हें ऐसे विषयों पर गंभीरता से विचार करके टिप्पणी करनी चाहिए।

क्या AU, BHU, AMU के पीएचडी होल्डर हरम के दलाल बन जायें ??

आदित्यनाथ

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