ABVP के संस्थापक जिनको कोई याद नहीं करता !

ABVP के संस्थापक बलराज मधोक जी थे। वो बहुत ही महान चिंतक थे, उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं थी। लेकिन जो पुस्तक सबसे ज्यादा प्रचलित हुई, #Indianization (भारतीयकरण) थी।

यह पुस्तक विचारों से भरी हुई है। बलराज मधोक एक ऐसे चिंतक थे जिन्होंने अरविंद घोष और नेहरू के भारतीयकरण के सिद्धांतों को विधिवत खंडित किया। भारतीयकरण पर उन्होंने दिल्ली के Constitution Club में बौद्धिक दिया , उस वक्त वहाँ दुनिया भर के बुद्धिजीवी इकट्ठा थे।

उनका बौद्धिक इतना गहरा था कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार आयोजकों पर कार्यवाही करने पर आमादा हो गयी थी। मधोक के भारतीयकरण के सिद्धांत में Savage और Civilize का द्वंद नहीं था।

उनका भारतीयकरण का सिद्धांत भारतीय दार्शनिक संदर्भों में समावेशी था। मुझे मालूम है कि आज उनको कोई याद नहीं करेगा। आज उनकी पुस्तक आपको ढूंढे नहीं मिलेगी। मैं भी वह पुस्तक अंडमान के एक पुस्तकालय में पढा था। और उस पर नोट बनाया था।
भारतीयकरण नामक पुस्तक में भारतीयकरण क्या, क्यूँ और कैसे पर तीन अध्याय लिखे हैं।मै यहाँ पर भारतीयकरण कैसे पर उनकी तीन बातों को बिन्दुवार ढंग से रखता हूँ ।

पहला,उन्होंने भाषा के आधार पर राज्यों के गठन की बात कही थी (1970), और उन्होंने कहा था कि दक्षिण में और भी राज्यों का निर्माण हो, हालाँकि उन्होंने इसपर विस्तृत तर्क भी दिया और उदाहरणों से समझाया है ।इसी में यह भी कहते हैं कि जब अमरीका की आबादी 20 करोड़ है तब वहां 50 राज्य हैं, तो भारत की आबादी अस्सी करोड़ होकर भी सिर्फ २२ राज्य ही क्यूँ हैं ?

भारतीयकरण कैसे में उन्होंने दूसरा तर्क Depoliticization of Caste की बात कही थी l

तीसरी बात उन्होंने कही थी कि एक धर्म की श्रेष्ठता की बात करने वाले लोगों ने दुनियां में बहुत रक्तपात किया है l चूँकि इनके धार्मिक मूल्यों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है अतः इनके वैचारिक शोधन पर सरकार और जागरूक लोग रूचि लें; नहीं तो राष्ट्र पर विभाजन के संकट अवश्यम्भावी हैं, यह होकर रहेगा l

चौथी महत्वपूर्ण बात उन्होंने कहा था कि वामपंथ मूलक देश जैसे चाइना और रशिया वामपंथ से जितने प्रभावित नहीं हैं, उनसे भी ज्यादा वृहद् रूप से भारत के वामपंथी इस चिंतन से पीड़ित रहते हैं l एक दिन ऐसा आएगा जब ये वामपंथी भारत में लोकतंत्र विरोधी होकर भाषाई अलगाववाद, भारत विरोधी धार्मिक कट्टरपंथ समर्थक और हिन्दू धार्मिक भावना के इतने मुखर विरोधी हो जायेंगे कि देश की अखंडता सुरक्षित रखने में बड़ी कठिनाई आएगी l
इसका समाधान बताते हुए उन्होंने कहा था कि भारत की शिक्षा पद्धति से अभारतीय मूल्यों और विचारों को उपयोगिता के आधार पर ही इस्तेमाल करें ना कि इसे व्यापक जनमानस का हिस्सा बना दें ।( उन्होंने इस पर हताशा व्यक्त की थी कि शायद ऐसा करने की इच्छाशक्ति भारत के काले अंग्रेजों में कभी आ पाए )

उन्होंने जातीय घृणा के प्रति लोगों को आगाह किया और इस बात को सुनिश्चित किया कि भारत स्वयं ही इस समस्या से निवारण पा लेगा । इसके लिए किसी मैकेयावेली की जरुरत नहीं पड़ेगी l
स्कूली शिक्षा के अभारतीय केन्द्रों पर उन्होंने काफी गंभीर टिप्पणियां की है और इसे भविष्य में विभाजन का महत्वपूर्ण कारण बताया है ।

अंत में वो कहते हैं कि इन विषयों पर सरकार के साथ-साथ समाज को भी ध्यान देने की जरुरत हैं, वर्ना इस राष्ट्र को गंभीर संकटों को बचाने कोई अवतार पैदा नहीं होगा ।1970 में उनकी भविष्यवाणी आज २०२० में भी कितनी उपयोगी है और इसके कई स्वरुप आज दिख रहे हैं । कितने महान युगद्रष्टा थे बलराज मधोक जी काश आज वह पुस्तक बाजार में होती काश आज परिषद के लोगों में ईमानदारी से अध्ययन की आदत होती तो परिषद के असली संस्थापक के जीवन पर पर मुझे नहीं लिखना पढता ।

आज परिषद ईमानदारी से हिन्द पॉकेट बुक्स से Indianisation : An explosive viewpoint in Indian politics that is appreciated, admired, criticised and often misunderstood” की कॉपीराइट ख़रीदे और उसे आम कार्यकर्ताओं के लिए पढने के लिए विभिन्न भाषाओ में उपलब्ध कराये।

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