योगी राज के प्रतीक चिन्ह और आम जन भावना 

महर्षि भारद्वाज जी के इस प्रतिमा का अनावरण भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद के द्वारा कुम्भ २०१९ में किया गया था । (२२ फरवरी २०२०)

प्रयागराज में योगी आदित्यनाथ को तीन बातों से जाना जाता है; पहला कुम्भ २०१९ के अद्भुत आयोजन, दूसरा इलाहबाद के प्राचीन नाम की पुनर्स्थापना और तीसरा बाहुबलियों और भूमाफिया पर ताबड़तोड़ कार्यवाही करने के लिए l यह तीनो कार्य आमजनों के रूपकों में  योगी आदित्यनाथ का बिम्ब एक सफल  प्रशासक के तौर पर स्थापित करता है । एक कुशल प्रशासक की  क्षमता राज्य के आवयश्क अंगों के द्वारा जनता तक प्रवाहित होती है ।

इन सभी बातों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि आखिर राज्य के प्रतिनिधि के रूप में एक प्रशासक के प्रभाव को कौन से  विधि से मूल्याङ्कन किया जाए ।हालाँकि इसका मूल्याङ्कन तो जनता प्रत्येक पांच वर्षों में  करती ही है ।लेकिन क्या इसका मध्याविधि मूल्याङ्कन और वह भी प्रमाण के सापेक्ष, संभव है ? 

जनता और जनप्रतिनिधियों का प्रमाणित मूल्याङ्कन हमेशा आलोचनाओं के आवरण में ही होता है; लेकिन योगी आदित्यनाथ का वर्तमान मूल्याङ्कन प्रयागराज की जनता के सामूहिक चेतनागत प्रतिक्रिया के आधार पर करने का एक प्रयास है l वर्तमान मूल्याङ्कन के लिये मैंने कुम्भ २०१९ के दौरान पेंट माई सिटी मुहिम के तत्वाधान में प्रयागराज के दीवारों पर  उकेरे गए चित्रों के आधार पर किया गया है ।हालाँकि इस अध्ययन में सम्पूर्ण प्रयागराज का दृश्यगत अनुभव है लेकिन यहाँ इसे सीमित चित्रों के द्वारा ही समझाया गया है ।

शहरी दीवारों को भद्दा करने की आम प्रवृति 

जैसा कि शहरी क्षेत्रों में आमतौर पर व्यवसायी, बाजार में उत्पादों को आम जनता तक पहुँचाने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रचार सामग्री का इस्तेमाल करते हैं l इस क्रम में आमतौर पर ऐसे व्यवसायी सामाजिक हितों को दरकिनार करते हुए निजी आर्थिक हितों के  संधान हेतु दीवारों पर अपने उत्पादों का प्रचार करते हैं l ऐसा करने के कारण शहरों की दीवार बदसूरत दिखने लगती है l ऐसा दुस्साहस खास तौर पर सरकारी सम्पतियों पर किया जाता है l  प्रयाग एक घनी आबादी वाला शहर है , अतः  यहाँ की दीवारों पर विभिन्न व्यवसायिक हितों से प्रेरित प्रचार सामग्री दीवारों पर चस्पा होना लाजिमी है l पिछले दस वर्षों के दौरान मैंने यहाँ की  सरकारी संस्थानों के दीवारों को पोस्टर, बैनर से रंगा हुआ पाया l आज अगर किसी संस्थान ने अपना प्रचार दीवारों पर किया तो उसके अगली सुबह आपको किसी दुसरे व्यवसायिक संस्थान का प्राचर सामग्री दीवारों पर चस्पा मिल जायेगा ।

लेकिन योगी राज के दौरान 

वर्ष २०१९ जनवरी में प्रयागराज कुम्भ मेला प्राधिकरण जो कि योगी सरकार की  देन है , इसके तत्वाधान में दीवारों को  विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और संदेशात्मक  चित्रों से सजाया गया है  l यह चित्र बेहद आकर्षक और सन्दर्भों के आग्रह से परिपूर्ण है  l ऐसे चित्रों के संयोजन से प्रयाग की सुन्दरता तो बढ़ ही गयी साथ साथ यहाँ के संस्थानिक दीवार भी एकदम साफ़ सुथरी हो गयी l लोगों को लगा कि यह सुन्दरता ज्यादा दिन नहीं चलने वाली है l लेकिन लगभग दो वर्ष बीतने को हैं और प्रयागराज की संस्थानिक दीवार अभी भी उसी तरह सुन्दर चित्रों के संयोजन से चमक रही है ।

व्यवसायिक संस्थानों की मानसिकता और योगी की  पेंट माई सिटी स्कीम 

वर्तमान चित्र एक लोगों के मानसिकता का एक तुलनात्मक अध्ययन है

यह चित्र इलाहबाद विश्वविद्यालय के डायमंड जुबली छात्रावास का है। इस चित्र में आप साफ़-साफ़ देख सकते हैं कि दीवार के दायें तरफ पेंट माई सिटी स्कीम के तहत चित्रकारी की गयी है और दीवार का बायाँ हिस्सा उससे अछूता है l जिस हिस्से में चित्रकारी है, वहां व्यवसायिक हितों वाले पोस्टर को लोगों ने चिपकाने से परहेज किया है, और बिना चित्रकारी वाले दीवार पर व्यवसायिक हितों वाले पोस्टर चिपकाये गये हैं l (17 दिसंबर २०२०)

दूसरे चित्र से भी यह साफ़ है कि लोगों ने चित्रकारी वाले दीवार पर पोस्टर चिपकाने की बजाय खाली दीवारों पर पोस्टर चिपकाये हैं l (17 दिसंबर २०२०)

चित्र संख्या ०३ 

चित्र संख्या ०४ 

यह चित्र संगम जाने के रेलवे ओवर ब्रिज के पास का है, पहले यहाँ भी भी विभिन्न कोचिंग संस्थानों के पोस्टर भरपूर चिपकाये रहते थे, जबकि यह घनी आबादी वाला क्षेत्र है लेकिन इस जगह आप दो वर्ष पुरानी चित्रकारी का आनंद उठा सकते हैं l (१२ दिसंबर २०२०)

चित्र संख्या ०५ 

यह इलाहबाद विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक दीवार है, दो वर्ष पहले यह दीवार इतनी साफ़ सुथरी नहीं दिखती थी l मैंने और अन्य छात्रों ने भी इतना साफ़ सुथरा दीवार शायद कभी नहीं देखा हो l मेरा तो कमसे कम एक दशक का अनुभव है l लेकिन बिना चित्रकारी के भी यह दीवार योगी आदित्यनाथ के पेंट माई सिटी के अंतर्गत रंगाई गयी थी l दो वर्षों में इसकी स्थिति कमोबेश यथावत है l (17 दिसंबर २०२०)

चित्र संख्या 06 

संगम के ईशान कोण पर स्थित अत्यंत प्राचीन गंगोली शिवाला का दृश्य माघ मेला २०२०

चित्र संख्या ०७ 

चित्र संख्या ०८ 

आदत से लाचार लोग धीरे धीरे इसे गन्दा करना चाह रहे हैं , लेकिन वो भी ऐसा करने में डर भी रहे हैं l हालाँकि सरकार को ऐसे कृत्यों पर हस्तक्षेप करके सुन्दरता बरकरार रखने का प्रयास करना चाहिए l क्यूंकि ऐसे चित्र गैर राजनैतिक और सामाजिक बदलाव के द्योतक भी हैं l 

ऐसे चित्रों  के माध्यम से आप आर्थिक दौड़ में शामिल लोगों का दीवारों को धीरे धीरे गन्दा करने का दुस्साहस देख सकते हैं l लेकिन यह दुस्साहस भय मिश्रित है l वर्तमान चित्र के माध्यम से आप योगी सरकार के प्रति अनुशासन हीनता के दंड का एक अदृश्य भय के रूप में देख सकते हैंl 

निष्कर्ष 

अतः प्रथम द्रष्टया उपरोक्त प्रमाणों के आधार पर हम यह तो कह  ही सकते हैं, प्रयागराज के लोगों का सौन्दर्यशास्त्र सिर्फ इसलिए नहीं व्यक्त हुआ क्यूंकि योगी आदित्यनाथ ने कुम्भ २०१९ के माध्यम से राष्ट्रिय स्वच्छता सर्वेक्षण में एक सम्मानजनक पहचान दिलाया है l बल्कि इसका अर्थ यह भी हुआ कि आर्थिक दौड़ से हताश लोग नियम कानून तोड़ने के लिए आतुर हैं लेकिन उन्हें योगी राज में ऐसा करने में डर लग रहा है l इसलिए जो प्रतीक सीधे रूप में  योगी राज से जुड़ा हुआ है उससे छेड़छाड़ करने से बच रहे हैं और अन्य सार्वजानिक सम्पतियों पर अपनी आर्थिक कुंठा निकाल रहे हैं l जैसे इस  दिशा और संकेत सूचक पट्टिकाओं की हालत देख लीजिये 

चित्र संख्या ०९ 

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